एक दीन मुझे किसी ने बताया की सूरज भगवन है। उसकी बात मान कर मैंने बाकी सारे भगवन को छोड़कर सिर्फ ओर सिर्फ सूरज को ही अपना भगवन मान थी रहा। लेखिन
फिर समाच में आ गया की सूरज जो पूरे ब्रमांड को रौशनी देता है वह सिर्फ एक मामूली लड़की केलिए अपना प्यार कैसे दे सकता है। यह तोह बस एक कहानी हैं। मैंने कभी भी सूरज को पाने की कोशिश नहीं किया। क्युकी मुझे बिलकुल भरोसा नहीं है एक तरफ़ा प्यार पर। फिर भी आज मुझे यह सोचने पर मचबूर करते है .क्या यह हो सकता है ?क्या हम अकेली सूरज को बेपनाह मोहब्बत कर सकती है?पता नहीं। सूरज इस पूरे धरती पर फेहला हुआ है उससे एक छोटी सी कोने में बेट कर प्यार करना पागल सी बात नहीं है तो फिर क्या है। जो बागवान इस पूरे धरती को रौशनी देती है मुझे अकेले में प्यार कैसे कर पायेगा। लेखिन वह कहता हेना मेरे अकेले की प्यार काफी है दूनो को खुश रहने केलिए। यह सब में इस्सलिये कह रही हूँ क्यूंकि जलती में एक कहानी लिखने वाली हूँ। तोह दोस्तों इंतज़ार कीजिये हमारा...
No comments:
Post a Comment